Electrohomiopathic

मैं ने अनुभव किया है कि इलेक्ट्रो होम्यो पैथी समझने के लिए इस अनमोल बोल को समझना जरुरी है-

1. पौधों के केमिकल विष भी हैं, और अमृत भी। विष उत्पादन के पहले पादप कोशिकाएं अमृत का निर्माण करती हैं। पौधों के उत्पाद के साथ हीं अमृत भी उपस्थित रहते हैं।

2. अमृत अमरत्व और स्वास्थ्य प्रदान करता है। जब कि विष जीवन और स्वास्थ्य का क्षरण करता है।

3. इलेक्ट्रो होम्यो पैथी औषधि के रूप में पौधों में पाए जाने वाले अमृत का उपयोग करती है।

4. स्वस्थ जीवन श्रृखंला बद्ध जैवरासायनिक अभिक्रियाओं का खेल है, जो एंजाइम द्वारा संपादित और नियंत्रित होता है।

5. सजीवों की कोशिकाओं द्वारा, कोशिकाओं के अंदर, कोशिकाओं के लिए संश्लेषित एंजाइम्स हीं सजीवों के अंदर की अमृत धारा है।

6. इस अमृत धारा की सक्रियता तक हीं जीवन है। या फिर एंजाइम्स जीवन का सक्रिय घटक है। “Enzymes are active principles ot lyfe”.

7. पौधों और जंतुओं के अंदर कोशिका स्तर पर उत्पादित एंजाइम्स या अमृत धारा में समानताएं हैं। जंतु जहाँ अपने वर्ज्य पदार्थों (मल मूत्र पसीना, श्वांस) के साथ उत्सर्जित कर देते हैं, वहाँ, पादप उत्सर्जन अंग के अभाव में उसे सुरक्षित रखे रहते हैं।

8. एंजाइम्स की सक्रियता के लिए माध्यम ( कोशिकाओं में) आक्सीजन की पर्याप्त सांद्रता के साथ इलेक्ट्रोलाइट्स की उपस्थिति आवश्यक होती है। या फिर इलेक्ट्रोलाइट्स की सक्रियता के लिए माध्यम ( कोशिकाओं में) में एंजाइम्स और आक्सीजन की उपस्थिति जरुरी होती है।

9. लिम्फ और ब्लड के स्टीडी स्टेट ( कांस्टेंट) में हीं स्वास्थ्य है, जीवन है।

10. लिम्फ और ब्लड को स्टीडी स्टेट में बनाए रखने की शारीरिक प्रयत्नशीलता या टेडेंसी “होम्योस्टैसिस ” है। पैथी का मध्य पद “होम्यो” शब्द इसी का बोधक है।

11. कोशिकाओं की आंशिक या सामान्य कार्य अक्षमता रोग है। कोशिकाओं की असामान्य कार्य अक्षमता मृत्यु है। इस प्रकार हर रोग अंग की कार्य अक्षमता या कमी है। इसलिए चिकित्सा अंग और कोशिकाओं की की जानी चाहिए।

12. विज्ञान की धरातल पर “इलेक्ट्रो होम्यो पैथी” चिकित्सा पद्धति के लिए व्यवहृत “इलेक्ट्रो” और “होम्यो” पद या शब्द पूर्णतः सार्थक और वैज्ञानिक पद्धति हैं। —-

****************.मैं सोच रहा हूँ कि इलेक्ट्रो होम्यो पैथी को अधिनियमित करने के लिए भारत सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के अधीन एक इंटर डिपार्टमेंट कमिटी का गठन किया है। इस कमिटी के सभी माननीय सदस्य अपने- अपने क्षेत्र और विषय के साइंस फैकल्टी के जाने माने वैज्ञानिक हैं। संपूर्ण भारत में इलेक्ट्रो होम्यो पैथी के नाम पर
इसके विकास में अनगिनत संस्थाएँ कार्यरत हैं। उनमें से 29 अदद संस्था संचालकों ने अपनी- अपनी डफली और अपना- अपना राग के तर्ज पर आ. डी. सी. के दरबार में पैथी को अधिनियमित करने के लिए अर्जी लगाईं है।
आइ. डी.सी.की मांग पर दुबारा एक कौमन प्रपोजल कमिटी के कार्यालय में प्रस्तुत किया गया है। इतफाक से किसी व्यक्ति के द्वारा प्रपोजल की एक कौपी समस्या प्रसाद सिंह को भी उपलब्ध कराया गया है। मैं ने उस कौमन प्रपोजल का गहन अध्ययन और मनन करने के बाद जो मैंने समझा वह बड़ी हीं विचित्र और हैरतअंगेज बातें सामने आई हैं। वह हैरतअंगेज इस लिए है, कि 29 अदद संस्था संचालकों में से एक भी संस्था संचालक का अध्ययन साइंस फैकल्टी का नहीं है, फिर भी वे मेडिकल जैसे साइंस फैकल्टी की पढ़ाई करवाते हैं।
पैथी को अधिनियमित करने के अनुसंशा करने के लिए संस्था संचालकों को निम्नलिखित क्रैटेरिया आइ. डी सी. द्वारा अपेक्षित की गई थी।

PRINCIPLES/CARITERIA
Essential Criteria
1. The system should have its own fundamental principles of health, and disease, which must differ in concepts from those of recognized system in the country. It should be a comprehensive system of health care and not restricted to few disease only.

2. Substantial literature on concept s, actilogy, diagnosis and management of disease like textbooks including Pharmacopoeia and Formularies and preferably journals if any, should be available in the country of origin or in other countries where it is currently practised.

3. Information on whether it is recognized officially as a system of medicine in the country of origin and/or in any other country, where it is currently practiced.

4. Documented information on uniqueness of modalities of treatment may be drugs, devices or any other methods such as diet, massage, exercise, etc.

5. Standardised method of preparation of drugs/ Devices used in therapy and quality control procedure should be available.
Desirable Criteria

6. Prescribed criteria of admission, curricula and training and details such courses and list of teaching and details such courses and list of teaching institutions in India / countries where it is currently recognized system of medicine.

7. Details of continuing medical education programs and available research facilities.

ऊपर अंकित किसी भी अपेक्षित क्रैटेरिया को कौन प्रपोजल पूरा करने की बात तो दूर है, स्पर्श तक नहीं करता है।

पैथी को अधिनियमित करने के लिए आइ डी सी द्वारा निर्धारित या अपेक्षित सभी क्रैटेरिया को सोना लैबोरेटरी, पटना के द्वारा प्रकाशित सभी किताबें पूर्ण रूप से पूरा करते हैं। अब तक संपूर्ण भारत में सोना लैब. पटना की प्रकाशित किताबों की 21 संपूर्ण सेट बिक्री हुई है। इस सेट में पैथी की स्टैंडर्ड दवा निर्माण के सूत्र भी प्रकाशित हैं। समस्या प्रसाद सिंह के पास पैथी के दो महान नेताओं के पास भी सूत्रों सहित फार्मा कोपिया की प्रतियां है, इसके प्रमाण हैं, लेकिन वे आइ. डी.सी. के सामने उसे नहीं रखेंगे। क्योंकि उनमें वर्णित वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर अगर आइ. डी.सी. भारत सरकार को पैथी को अधिनियमित करने के लिए अनुसंशा भेज दिया, और उन विज्ञान आधारित किताबों और वर्णित फार्मेसी अधिनियमित हो गई, तो भारत में पैथी के नेताओं और संस्था संचालकों की खेती बंद हो जाएगी।
आप सब की विनित सेवा में
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कहानी।

एक बार एक नदी में हाथी की लाश बही जा रही थी। एक कौए ने लाश देखी, तो प्रसन्न हो उठा, तुरन्त उस पर आ बैठा। यथेष्ट मांस खाया। नदी का जल पिया। उस लाश पर इधर-उधर फुदकते हुए कौए ने परम तृप्ति की डकार ली।

वह सोचने लगा, अहा ! यह तो अत्यन्त सुन्दर यान है, यहाँ भोजन और जल की भी कमी नहीं। फिर इसे छोड़कर अन्यत्र क्यों भटकता फिरूँ ? कौआ नदी के साथ बहने वाली उस लाश के ऊपर कई दिनों तक रमता रहा।

भूख लगने पर वह लाश को नोचकर खा लेता, प्यास लगने पर नदी का पानी पी लेता। अगाध जलराशि, उसका तेज प्रवाह, किनारे पर दूर-दूर तक फैले प्रकृति के मनोहरी दृश्य-इन्हें देख-देखकर वह विभोर होता रहा।

नदी एक दिन आखिर महासागर में मिली। वह मुदित थी कि उसे अपना गंतव्य प्राप्त हुआ। सागर से मिलना ही उसका चरम लक्ष्य था, किन्तु उस दिन लक्ष्यहीन कौए की तो बड़ी दुर्गति हो गई।

चार दिन की मौज-मस्ती ने उसे ऐसी जगह ला पटका था, जहाँ उसके लिए न भोजन था, न पेयजल और न ही कोई आश्रय। सब ओर सीमाहीन अनंत खारी जल-राशि तरंगायित हो रही थी।

कौआ थका-हारा और भूखा-प्यासा कुछ दिन तक तो चारों दिशाओं में पंख फटकारता रहा, अपनी छिछली और टेढ़ी-मेढ़ी उड़ानों से झूठा रौब फैलाता रहा, किन्तु महासागर का ओर-छोर उसे कहीं नजर नहीं आया।

आखिरकार थककर, दुख से कातर होकर वह सागर की उन्हीं गगनचुंबी लहरों में गिर गया। एक विशाल मगरमच्छ उसे निगल गया।

शारीरिक सुख में लिप्त मनुष्यों की भी गति उसी कौए की तरह होती है, जो आहार और आश्रय को ही परम गति मानते हैं और अंत में अनन्त संसार रूपी सागर में समा जाते है।

जीत किसके लिए, हार किसके लिए,
ज़िंदगी भर ये तकरार किसके लिए।
जो भी आया है वो जायेगा एक दिन,
फिर ये इतना अहंकार किसके लिए ??

*~एक शर्मनाक कड़वी सच्चाई…!!!~*

*~एक शर्मनाक कड़वी सच्चाई…!!!~*

*नदी तालाब में नहाने में शर्म आती है,
और
स्विमिंग पूल में तैरने को फैशन कहते हैं.*

गरीब को एक रुपया दान नहीं कर सकते,
और
वेटर को टिप देने में गर्व महसूस करते हैं.

*माँ बाप को एक गिलास पानी भी नहीं दे सकते,
और
नेताओं को देखते ही वेटर बन जाते हैं.*

बड़ों के आगे सिर ढकने में प्रॉब्लम है,
लेकिन
धूल से बचने के लिए ‘ममी’ बनने को भी तैयार हैं.

*पंगत में बैठकर खाना दकियानूसी लगता है,
और
पार्टियों में खाने के लिए लाइन लगाना अच्छा लगता है.*

*बहन कुछ माँगे तो फिजूल खर्च लगता है,
और
गर्लफ्रेन्ड की डिमांड को अपना सौभाग्य समझते हैं.*

गरीब की सब्ज़ियाँ खरीदने मे इन्सल्ट होती है,
और
शॉपिंग मॉल में अपनी जेब कटवाना गर्व की बात है.

*बाप के मरने पर सिर मुंडवाने में हिचकते हैं,
और
‘गजनी’ लुक के लिए हर महीने गंजे हो सकते हैं.*

कोई पंडित अगर चोटी रखे तो उसे एन्टीना कहते हैं.
और
शाहरुख के ‘डॉन’ लुक के दीवाने बने फिरते हैं.
.
*किसानों के द्वारा उगाया अनाज खाने लायक नहीं लगता,
और
उसी अनाज को पॉलिश कर के कम्पनियाँ बेचें, तो क्वालिटी नजर आने लगती है…॥*

ये सब मात्र अपसंस्कृति ही नही,
देश व समाज का दुर्भाग्य भी है ।

आपकी इच्छा हो तो शेयर करे।अन्यथा कोई कसम बंधन नही है।

वन्देमातरम

🇮🇳✍ भारतीय कलम से ✍🇮🇳 🙏🙏🙏🙏👌🏻👌🏻🙏🙏🌴🌳🌱🌳🌳🌲🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱##

दीपावली।

यह कविता भारतरत्न आदरणीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की है और दीपावली की शुभकामनाएं इससे ज्यादा अच्छी तरह व्यक्त नहीं की जा सकती।
सभी मित्रों एवं उनके परिवारजनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं…….

जब मन में हो मौज बहारों की
चमकाएँ चमक सितारों की,
जब ख़ुशियों के शुभ घेरे हों
तन्हाई में भी मेले हों,
आनंद की आभा होती है
*उस रोज़ ‘दिवाली’ होती है ।*

जब प्रेम के दीपक जलते हों
सपने जब सच में बदलते हों,
मन में हो मधुरता भावों की
जब लहके फ़सलें चावों की,
उत्साह की आभा होती है
*उस रोज़ दिवाली होती है ।*

जब प्रेम से मीत बुलाते हों
दुश्मन भी गले लगाते हों,
जब कहींं किसी से वैर न हो
सब अपने हों, कोई ग़ैर न हो,
अपनत्व की आभा होती है
*उस रोज़ दिवाली होती है ।*

जब तन-मन-जीवन सज जाएं
सद्-भाव के बाजे बज जाएं,
महकाए ख़ुशबू ख़ुशियों की
मुस्काएं चंदनिया सुधियों की,
तृप्ति की आभा होती है
*उस रोज़ ‘दिवाली’ होती है .*।

आपको सादर सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं 💐🙏💐🙏💐🙏🏻💐🙏🏻💐🙏🏻💐

अंशुमान सिंह।

विजयदमी।

आज का दिन विजयादशमी जो कि पाप पर पूण्य की विजय का प्रतीक है श्री रामचन्द्र जी ने आज के दिन महाप्रतापी,महाज्ञानी दशानन रावण का वध नही किया बल्कि उसके घमंड ओर पाप का वध किया और विजय प्राप्त की इस अवसर को विजयादशमी में रूप में हम मानते है और हर साल पुतले के रूप में रावण का वध करते है मगर सोचने के लिए एक ही बात काफी है हम किसका वध करने जाते है उस रावण का जो कि अपने कुटुम्ब के लिए अपनी पूरी लंका तबा कर दी या उस रावण का जिसने अहंकार में आकर सीता जी को छल से हर कर लेकर गया ? हमे अपने अंदर के झूठ रूपी,अहंकार रूपी , छल, कपट , रूपी रावण को मारना है वरना रावण खुद इतना विद्वान था जिसको मारने की जरूरत नही अपनाने की जरूरत है आज हम सभी अपने अंदर के अहंकार रूपी रावण को मारे न कि उस रावण को जो कि महाप्रतापी है । हम अपने अंदर के छल रूपी रावण को मारे न कि उस अजय कुटुम्बकम को जो कि अपने परिवार के लिए एक स्तम्भ की तरह खड़ा रहा । आज हमें उस रावण को मारने की जरूरत है ,जिसने सारे समाज मे गंदगी फेला रखी है न कि उस रावण को जो तीनों लोकों में प्रसिद्वि लिए हुए जो भगवान शिव का अनन्य भक्त है जो हर मुश्किल में अपनों के साथ है ।

आप सभी जेष्ठ जनों को अच्छाई पर बुराई के प्रति जीत विजयादशमी की अनन्त शुभकामनाएं आप हमेशा अपनो के संघ रहे और अपने स्तम्भ मजबूत रखे यही कामनाओ के साथ मे आप सभी को एक बार फिर विजयादशमी की अनन्त अनन्त शुभकामनाएं देता हूं अपने से अनुज को बहुत प्यार दुलार ओर संस्कार के साथ आप सभी का छोटा सा सदस्य।

##अंशुमान सिंह##

🙏🏻🙏🏻

पिता और माता …………….।

•पिता की सख्ती को बर्दाशत करो, ताकी काबिल बन सको,

•पिता की बातें गौर से सुनो, ताकी दुसरो की न सुननी पड़े,

•पिता के सामने ऊंचा मत बोलो वरना भगवान तुमको नीचा कर देगा,

•पिता का सम्मान करो, ताकी तुम्हारी संतान तुम्हारा सम्मान करे,

•पिता की इज्जत करो, ताकी इससे फायदा उठा सको,

•पिता का हुक्म मानो, ताकी खुश हाल रह सको,

•पिता के सामने नजरे झुका कर रखो, ताकी भगवान तुमको दुनियां मे आगे करे,

•पिता एक किताब है जिसपर अनुभव लिखा जाता है,

•पिता के आंसु तुम्हारे सामने न गिरे, वरना भगवान तुम्हे दुनिया से गिरा देगा,
पिता एक ऐसी हस्ती है …!!!!

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माँ का मुकाम तो बेशक़ अपनी जगह है ! पर पिता का भी कुछ कम नही, माँ के कदमों मे स्वर्ग है पर पिता स्वर्ग का दरवाजा है, अगर दरवाज़ा ना ख़ुला तो अंदर कैसे जाओगे ?
जो गरमी हो या सर्दी अपने बच्चों की रोज़ी रोटी की फ़िक्र में परेशान रहता है, ना कोई पिता के जैसा प्यार दे सकता है ना कर सकता है, अपने बच्चों से !!

याद रख़े सूरज गरम ज़रूर होता है मगर डूब जाए तो अंधेरा छा जाता है, !!

आओ आज़ सब मिलकर उस अज़ीम हस्ती के लिए कामना करते है..|

हे भगवान मेरे पिता को अच्छी सेहत ओर तंदूरस्ती देना।

उनकी तमाम परेशानी को दूर कर, और उन्हें हमेंशा हमारे लिए खुश रख़ना।

इस संदेश को सभी लोगों तक पहुंचाया जाए…………….….।

अँग्रेजी से प्यार है ।

अँग्रेजी से प्यार है, हिंदी से परहेज,
ऊपर से हैं इंडियन, भीतर से अँगरेज

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अंतरपट में खोजिए, छिपा हुआ है खोट,
मिल जाएगी आपको, बिल्कुल सत्य रिपोट

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अंदर काला हृदय है, ऊपर गोरा मुक्ख,
ऐसे लोगों को मिले, परनिंदा में सुक्ख

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अक्लमंद से कह रहे, मिस्टर मूर्खानंद,
देश-धर्म में क्या धरा, पैसे में आनंद

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अंधा प्रेमी अक्ल से, काम नहीं कुछ लेय
प्रेम-नशे में गधी भी, परी दिखाई देय

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अगर फूल के साथ में, लगे न होते शूल
बिना बात ही छेड़ते, उनको नामाक़ूल

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अगर चुनावी वायदे, पूर्ण करे सरकार
इंतज़ार के मजे सब, हो जाएं बेकार

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मेरी भाव बाधा हरो, पूज्य बिहारीलाल
दोहा बनकर सामने, दर्शन दो तत्काल।