जब ठगे गए गणेश जी एक भक्ति से ओतप्रोत कथा।

जब ठगे गए गणेश जी एक भक्ति से ओतप्रोत कथा।

गणेश जी विघ्न विनाशक व शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं। अगर कोई सच्चे मन से गणोश जी की वंदना करता है, तो गौरी नंदन तुरंत प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

वैसे भी गणेश जी जिस स्थान पर निवास करते हैं, उनकी दोनों पत्नियां ऋद्धि तथा सिद्धि भी उनके साथ रहती हैं उनके दोनों पुत्र शुभ व लाभ का आगमन भी गणेश जी के साथ ही होता है।

कभी-कभी तो भक्त भगवान को असमंजस में डाल देते हैं। पूजा-पाठ व भक्ति का जो वरदान मांगते हैं, वह निराला होता है।

काफ़ी समय पहले की बात है एक गांव में एक अंधी बुढ़िया रहती थी। वह गणेश जी की परम भक्त थी। आंखों से भले ही दिखाई नहीं देता था, परंतु वह सुबह शाम गणेश जी की बंदगी में मग्न रहती।

नित्य गणेश जी की प्रतिमा के आगे बैठकर उनकी स्तुति करती। भजन गाती व समाधि में लीन रहती। गणेश जी बुढ़िया की भक्ति से बड़े प्रसन्न हुए। उन्होंने सोचा यह बुढ़िया नित्य हमारा स्मरण करती है, परंतु बदले में कभी कुछ नहीं मांगती।

भक्ति का फल तो उसे मिलना ही चाहिए। ऐसा सोचकर गणेश जी एक दिन बुढ़िया के सम्मुख प्रकट हुए तथा बोले- ‘माई, तुम हमारी सच्ची भक्त हो। जिस श्रद्धा व विश्वास से हमारा स्मरण करती हो, हम उससे प्रसन्न हैं। अत: तुम जो वरदान चाहो, हमसे मांग सकती हो।’

बुढ़िया बोली- ‘प्रभो! मैं तो आपकी भक्ति प्रेम भाव से करती हूं। मांगने का तो मैंने कभी सोचा ही नहीं। अत: मुझे कुछ नहीं चाहिए।’ गणेश जी पुन: बोले- ‘हम वरदान देने केलिए आए हैं।’

बुढ़िया बोली- ‘हे सर्वेश्वर, मुझे मांगना तो नहीं आता। अगर आप कहें, तो मैं कल मांग लूंगी। तब तक मैं अपने बेटे व बहू से भी सलाह मश्विरा कर लूंगी। गणेश जी कल आने का वादा करके वापस लौट गए।’

बुढ़िया का एक पुत्र व बहू थे। बुढ़िया ने सारी बात उन्हें बताकर सलाह मांगी। बेटा बोला- ‘मां, तुम गणेश जी से ढेर सारा पैसा मांग लो। हमारी ग़रीबी दूर हो जाएगी।

सब सुख चैन से रहेंगे।’ बुढ़िया की बहू बोली- ‘नहीं आप एक सुंदर पोते का वरदान मांगें। वंश को आगे बढ़ाने वाला भी, तो चाहिए।’ बुढ़िया बेटे और बहू की बातें सुनकर असमंजस में पड़ गई।

उसने सोचा- यह दोनों तो अपने-अपने मतलब की बातें कर रहे हैं। बुढ़िया ने पड़ोसियों से सलाह लेने का मन बनाया। पड़ोसन भी नेक दिल थी।

उसने बुढ़िया को समझाया कि तुम्हारी सारी ज़िंदगी दुखों में कटी है। अब जो थोड़ा जीवन बचा है, वह तो सुख से व्यतीत हो जाए। धन अथवा पोते का तुम क्या करोंगी!

अगर तुम्हारी आंखें ही नहीं हैं, तो यह संसारिक वस्तुएं तुम्हारे लिए व्यर्थ हैं। अत: तुम अपने लिए दोनों आंखें मांग लो।’

बुढ़िया घर लौट आई। बुढ़िया और भी सोच में पड़ गई। उसने सोचा- कुछ ऐसा मांग लूं, जिससे मेरा, बहू व बेटे- सबका भला हो। लेकिन ऐसा क्या हो सकता है?

इसी उधेड़तुन में सारा दिन व्यतीत हो गया। बुढ़िया कभी कुछ मांगने का मन बनाती, तो कभी कुछ। परंतु

कुछ भी निर्धारित न कर सकी। दूसरे दिन गणेश जी पुन: प्रकट हुए तथा बोले- ‘आप जो भी मांगेंगे, वह हमारी कृपा से हो जाएगा। यह हमारा वचन है।’

गणेश जी के पावन वचन सुनकर बुढ़िया बोली- ‘हे गणराज, यदि आप मुझसे प्रसन्न हैं, तो कृप्या मुझे मन इच्छित वरदान दीजिए। मैं अपने पोते को सोने के गिलास में दूध पीते देखना चाहती हूं।’

बुढ़िया की बातें सुनकर गणेश जी उसकी सादगी व सरलता पर मुस्कुरा दिए। बोले- ‘तुमने तो मुझे ठग ही लिया है। मैंने तुम्हें एक वरदान मांगने के लिए बोला था, परंतु तुमने तो एक वरदान में ही सबकुछ मांग लिया।

तुमने अपने लिए लंबी उम्र तथा दोनों आंखे मांग ली हैं। बेटे के लिए धन व बहू के लिए पोता भी मांग लिया। पोता होगा, ढेर सारा पैसा होगा, तभी तो वह सोने के गिलास में दूध पीएगा। पोते को देखने के लिए तुम जिंदा रहोगी, तभी तो देख पाओगी।

अब देखने के लिए दो आंखें भी देनी ही पड़ेंगी।’ फिर भी वह बोले- ‘जो तुमने मांगा, वे सब सत्य होगा।’ यूं कहकर गणेश जी अंर्तध्यान हो गए। कुछ समय पाकर गणेश जी की कृपा से बुढ़िया के घर पोता हुआ।

बेटे का कारोबार चल निकला तथा बुढ़िया की आंखों की रौशनी वापस लौट आई। बुढ़िया अपने परिवार सहित सुख पूर्वक जीवन व्यतीत करने लगे।
बोलो गजानन महाराज की जय।

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कहानी।

एक शराबी ठेके से पौव्वा खरीदा,
वहीं नीट गटका और चल पड़ा अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने उसकी गली |
रास्ते में अचानक एक दुर्घटना घट गयी,
जमीन हिलने लगी, आसमान नीचे गिरने लगा, पृथ्वी ही पलटने लगी |
शराबी ने आसपास नजर दौड़ाई, उसे कोई नजर नहीं आया |
वह बहुत ही बुरी तरह घबरा गया |
उसे लगा यदि उसने समय रहते कोई उचित कदम नहीं उठाया तो पृथ्वी पलट जायेगी और कई मासूम मारे जायेंगे, और हो सकता है उसकी गर्लफ्रेंड भी…..
अरे नहींssssssssssssss…! उसके मुँह से चीख निकल गयी | और दौड़ कर पास ही खड़े एक खम्बे को पकड़ लिया |
खम्बे को थामते ही सब कुछ उसे सामान्य होता दिखने लगा | पृथ्वी अब नहीं पलट रही थी, आसमान नहीं गिर रहा था | उसने ईश्वर का धन्यवाद दिया कि सही समय पर उसे सद्बुद्धि दी कि खम्बे को थामना चाहिए | अब इसी अवस्था में वह बैठा रहा |
कुछ देर बाद कुछ लोग वहां से गुजरे तो उसे खम्बा छोड़कर अपने घर जाने के लिए कहा | शराबी बोला कि यदि खम्बा छोड़ दिया तो पृथ्वी पलट जायेगी आसमान गिर जायेगा |
लोगों ने बहुत समझाने की कोशिश की तब वह खम्बा छोड़ने को राजी हुआ | लेकिन अब नयी समस्या खड़ी हो गयी कि खम्बे ने उसे पकड लिया था | अब वह चाहकर भी खम्बे को नहीं छोड़ पा रहा था |
बस यही स्थिति उन लोगों की है, जो प्रश्न करते हैं कि विकल्प क्या है ???
किसी ने किसी को, तो किसी ने किसी को और सभी के साथ समस्या यह है कि उन्हें लगता है कि यदि उसने उन्हें छोड़ दिया तो आसमान गिर पड़ेगा, पृथ्वी पलट जायेगी और कोई विकल्प ही नहीं है उनके पास |
धर्म, जाति, सांप्रदायिक उन्माद के ठर्रे के नशे में धुत्त इन धर्मान्धों, जाति व पार्टी भक्तों को लगता है कि इन्ही की वजह से यह देश टिका है, आसमान टिका है….
और जब तक इनका नशा नहीं उतरेगा, ये इसी प्रकार खम्बा पकड़े पड़े रहेंगे |
🤗🤗🕵🏻🙏🏻🙏🏻🕺🏻☝☝👌👌👐🏻👐🏻✍✍✍✍💎

बेटिया_मर_रही_हैं…।

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बेटिया_मर_रही_हैं…

टीवी पे ऐड आता है सिर्फ एक कैप्सूल #72घंटो के अंदर अनचाही प्रेगनेंसी से छुटकारा.????
बिना दिमाक की #लडकिया फॉर्म में…हर हप्ते नया #बॉयफ्रेंड…#सेक्स फिर…#गोलिया जिसका न कम्पोजीशन पता होता है न कांसेप्ट…बस निगल जाती हैं…
इन फेक गोलियों में #आर्सेनिक भरा होता है यह 72 घंटो के अंदर सिर्फ बनने वाले #भ्रूण को खत्म नही करता बल्कि पूरा का पूरा #fertility_system ही करप्ट कर देता है…शुरू में तो गोलिया खाकर #सती_सावित्री बन जाती हैं लेकिन #शादी के बाद पता चलता है ये #बाझ बन गयी अब #माँ नही बन सकती…तो सबको पता चल जाता है इनका #भूतकाल कैसा रहा है पर कोई बोलता नही जिन्दगी खुद #अभिशाप बन जाती है…
पहली चीज #प्रेगनेंट नही होना तो सेक्स क्यों और दूसरी चीज आशा, ANM, आगनवाडी, सरकारी स्वास्थ्य केंद्र क्या झक्क मराने के लिए हैं…
सरकार हर साल #मातृत्व_सुरक्षा के नाम पर करोड़ो फुक देती है और आपकी जुल्मी लड़कियाँ खुद डॉक्टर बन जाती है…आज हालत ये हैं 13-14 साल की बच्चिया बैग में i-pill लेकर घूम रही है ये मरेंगी नही तो क्या होगा…कभी समय निकालकर अपनी बेटी या बहन का बैग भी चेक कर लिया करो हर साल लाखो बच्चिया बच्चेदानी के #कैंसर से मर जाती हैं उसका एकमात्र कारण माता पिता और भाई की लापरवाही…

हमारी बात बहुत सी महिलाओं को बुरी लग सकती है ,
पर मेरी बहनों बेटियों ये पोस्ट तुम्हें सच्चाई से रूबरू
कराने के लिऐ है ।
अगर फिर भी आपको बुरा लगे तो करबद्ध माफ़ी मांगते हैं जी ।🙏🙏🙏🙏

रोक न पाया खुद को ये पोस्ट करने से……।

रोक न पाया खुद को ये पोस्ट करने से बच्चा पैदा करने के लिए क्या आवश्यक है..??👇👇
#पुरुष_का_स्पर्म और #औरत_का_गर्भ !!! लेकिन रुकिए सिर्फ गर्भ , नहीं नहीं एक ऐसा शरीर जो इस क्रिया के लिए तैयार हो जबकि स्पर्म के लिए 13 साल का स्पर्म और 70 साल का स्पर्म भी चलेगा ।।
लेकिन गर्भाशय मजबूत होना चाहिए इसलिए सेहत भी अच्छी होनी चाहिए एक ऐसी स्त्री का गर्भाशय जिसको बाकायदा हर महीने समयानुसार माहवारी आती हो, जी हां वही माहवारी जिसको सभी स्त्रियां हर महीने बर्दाश्त करती हैं ..।।
क्योंकि महावारी उनका चॉइस नहीं है ,यह कुदरत के द्वारा दिया गया एक नियम है। वही महावारी जिसमें शरीर पूरा अकड़ जाता है . ‌‌कमर लगता है टूट गई , पैरों की पिंडलियां फटने लगती हैं, लगता है पेड़ू में किसी ने पत्थर ठूंस दिए हों, दर्द की हिलोरें सिहरन पैदा करती हैं ..।।
ऊपर से इसको छुपा छुपा के रखना अपने आप में किसी जंग से कम नहीं, बच्चे को जन्म देते समय असहनीय दर्द को बर्दाश्त करने के लिए मानसिक रूप से और शारीरिक रूप से तैयार हों ( 40 हड्डियां एक साथ टूटेंगे जैसा दर्द सहन करने की क्षमता से परिपूर्ण हों) गर्भधारण करने के बाद शुरू के 3 से 4 महीने जबरदस्त शारीरिक और हार्मोनल बदलाव के चलते उल्टियां थकान अवसाद के लिए मानसिक रूप से तैयार हों, 5वें से 9वें महीने तक अपने बढ़े हुए पेट और शरीर के साथ सभी काम यथावत करने की शक्ति हो
गर्भधारण के बाद कुछ विशेष परिस्थितियों में तरह तरह के हर दूसरे तीसरे दिन इंजेक्शन ठुकवानें की हिम्मत रखती हों (जो कभी एक इंजेक्शन लगने पर भी घर को अपने सिर पर उठा लेती रही हो )
प्रसव पीड़ा को दो-चार 6 घंटे के अलावा 2 दिन 3 दिन तक बर्दाश्त कर सके और अगर फिर भी बच्चे का आगमन ना हो तो गर्भ को चीरकर बच्चे को बाहर निकलवाने की हिम्मत रखती हो….।।
अपने खूबसूरत शरीर में स्ट्रेच मार्क्स और ऑपरेशन का निशान ताउम्र अपने साथ ढोने को तैयार हों कभी कभी प्रसव के बाद दूध कम उतरने या ना उतरने की दशा में तरह-तरह के काढ़े और दवाई पीने का साहस रखती हो जो अपनी नींद को दांव पर लगाकर दिन और रात में कोई फर्क ना करती हो जो उसकी सुसु और पाटी की नैपियां धुलने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो 3 साल तक सिर्फ बच्चे के लिए ही जीने की शर्त पर गर्भधारण के लिए राजी होती
औरत के जिगर की तुलना तुम अपने व्यर्थ में बहा देने वाले स्पर्म से क्या करोगे…👆
स्पर्म तो बाजार में भी उपलब्ध है और इंजेक्शन के द्वारा गर्भ में धारण कराया जा सकता है लेकिन एक गर्भ में आने के बाद एक स्त्री की यही मनोदशा होती है जिसे एक पुरुष शायद ही कभी समझ पाए ।।

स्त्री और पुरुष के प्रेम में फर्क है…..।

» स्त्री और पुरुष के प्रेम में फर्क है

अपरिचित में एक आकर्षण है, क्योंकि उसके प्रेम में कोई कारण नहीं होता..!!
जब पुरुष किसी स्त्री को प्रेम करता है, तो उसका प्रेम भी बौद्धिक होता है। वह उसे भी सोचता-विचारता है। उसके प्रेम में भी गणित होता है। स्त्री जब किसी को प्रेम करती है, तो वह प्रेम बिलकुल अंधा होता है। उसमें गणित बिलकुल नहीं होता।
इसलिए स्त्री और पुरुष के प्रेम में फर्क पाया जाता है। पुरुष का प्रेम आज होगा, कल खो सकता है।
स्त्री का प्रेम खोना बहुत मुश्किल है। और इसलिए स्त्री-पुरुष के बीच कभी तालमेल नहीं बैठ पाता। क्योंकि आज लगता है प्रेम करने जैसा, कल बुद्धि को लग सकता है न करने जैसा। और आज जो कारण थे, कल नहीं रह जाएंगे। कारण रोज बदल जाएंगे। आज जो स्त्री सुंदर मालूम पड़ती थी, इसलिए प्रेम मालूम पड़ता था; कल निरंतर परिचय के बाद वह सुंदर नहीं मालूम पड़ेगी। क्योंकि सभी तरह का परिचय सौंदर्य को कम कर देता है। अपरिचित में एक आकर्षण है। लेकिन स्त्री कल भी इतना ही प्रेम करेगी, क्योंकि उसके प्रेम में कोई कारण न था। वह उसके पूरे अस्तित्व की पुकार थी। इसलिए स्त्री बहुत फिक्र नहीं करती कि पुरुष सुंदर है या नहीं। इसलिए पुरुष सौंदर्य की चिंता नहीं करता।
यह जान कर आप हैरान होंगे। हम सबको खयाल में आता है कि स्त्रियां इतना सौंदर्य की क्यों चिंता करती है? इतने वस्त्रों की, इतनी फैशन की, इतने गहने, इतने जवाहरातों की? तो शायद आप सोचते होंगे, यह कोई स्त्री-चित्त में कोई बात है। बात उलटी है। उलटी बात है; उलटी ऐसी है कि स्त्री-चित्त यह सारा इंतजाम इसीलिए करता है, क्योंकि पुरुष इससे ही प्रभावित होता है।
पुरुष का कोई और अस्तित्वगत आकर्षण नहीं है। इसलिए स्त्री को पूरे वक्त इंतजाम करना पड़ता है। और पुरुष एक से ही कपड़े जिंदगी भर पहनता रहता है। उसे चिंता नहीं आती, क्योंकि स्त्री कपड़ों के कारण प्रेम नहीं करती। और पुरुष हीरे-जवाहरात न पहने, तो कोई अंतर नहीं पड़ता है। स्त्री हीरे-जवाहरात देखती ही नहीं। पुरुष सुंदर है या नहीं, इसकी भी स्त्री फिक्र नहीं करती। उसका प्रेम है, तो सब है। और उसका प्रेम नहीं है, तो कुछ भी नहीं है। फिर बाकी चीजें बिलकुल मूल्य की नहीं हैं। लेकिन पुरुष के लिए बाकी चीजें बहुत मूल्य की हैं।
सच तो यह है कि जिस स्त्री को पुरुष प्रेम करता है, अगर उसका सब आवरण और सब सजावट अलग कर ली जाए, तो नब्बे प्रतिशत स्त्री तो विदा हो जाएगी। और इसलिए अपनी पत्नी को प्रेम करना रोज-रोज कठिन होता चला जाता है, क्योंकि अपनी पत्नी बिना सजावट के दिखाई पड़ने लगती है। नब्बे प्रतिशत तो मेकअप है, वह विदा हो जाता है, जैसे ही हम परिचित होना शुरू होते हैं।
स्त्री ने कोई मांग नहीं की है पुरुष से, उसका पुरुष होना पर्याप्त है, और स्त्री का प्रेम है, तो यह काफी कारण है। उसका प्रेम भी इंटयूटिव है; इंटलेक्चुअल नहीं है, बौद्धिक नहीं है। और दूसरी बात, उसके प्रेम के इंटयूटिव होने के साथ-साथ उसका प्रेम पूरा है। पूरे का अर्थ है, उसके पूरे शरीर से उसका प्रेम जन्मता है।
पुरुष के पूरे शरीर से प्रेम नहीं जन्मता; उसका प्रेम बहुत कुछ जेनिटल है। इसलिए जैसे ही पुरुष किसी स्त्री को प्रेम करता है, प्रेम बहुत जल्दी कामवासना की मांग शुरू कर देता है। स्त्री वर्षों प्रेम कर सकती है बिना कामवासना की मांग किए।
सच तो यह है कि जब स्त्री बहुत गहरा प्रेम करती है, तो उस बीच पुरुष की कामवासना की मांग उसको धक्का ही देती है, शॉक ही पहुंचाती है। उसे एकदम खयाल भी नहीं आता कि इतने गहरे प्रेम में और कामवासना की मांग की जा सकती है..! मैं सैकड़ों स्त्रियों को, उनके निकट, उनकी आंतरिक परेशानियों से परिचित हूं। अब तक मैंने एक स्त्री ऐसी नहीं पाई, जिसकी परेशानी यह न हो कि पुरुष उससे निरंतर कामवासना की मांग किए चले जाते हैं। और हर स्त्री परेशान हो जाती है। क्योंकि जहां उसे प्रेम का आकर्षण होता है, वहां पुरुष को सिर्फ काम का आकर्षण होता है। और पुरुष की जैसे ही काम की तृप्ति हुई, पुरुष स्त्री को भूल जाता है।
स्त्री को निरंतर यह अनुभव होता है कि उसका उपयोग किया गया है, शी हैज बीन यूज्ड, प्रेम नहीं किया गया, उसका उपयोग किया गया है। पुरुष को कुछ उत्तेजना अपनी फेंक देनी है। उसके लिए स्त्री का एक बर्तन की तरह उपयोग किया गया है। और उपयोग के बाद ही स्त्री व्यर्थ मालूम होती है। लेकिन स्त्री का प्रेम गहन है, वह पूरे शरीर से है, रोएं-रोएं से है। वह जेनिटल नहीं है, वह टोटल है।
कोई भी चीज पूर्ण तभी होती है, जब वह बौद्धिक न हो। क्योंकि बुद्धि सिर्फ एक खंड है मनुष्य के व्यक्तित्व का, पूरा नहीं है वह, इसलिए स्त्री असल में अपने बेटे को जिस भांति प्रेम कर पाती है, उस भांति प्रेम का अनुभव उसे पति के साथ कभी नहीं हो पाता। पुराने ऋषियों ने तो एक बहुत हैरानी की बात कही है।
उपनिषद के ऋषियों ने आशीर्वाद दिया है नवविवाहित वधुओं को और कहा है कि तुम अपने पति को इतना प्रेम करना, इतना प्रेम करना, कि अंत में दस तुम्हारे पुत्र हों और ग्यारहवां पुत्र तुम्हारा पति हो जाए। उपनिषद के ऋषि यह कहते हैं कि स्त्री का पूरा प्रेम उसी दिन होता है, जब वह अपने पति को भी अपने पुत्र की तरह अनुभव करने लगती है। असल में, स्त्री अपने पुत्र को पूरा प्रेम कर पाती है; उसमें कोई फिर बौद्धिकता नहीं होती। और अपने बेटे के पूरे शरीर को प्रेम कर पाती है; उसमें कोई चुनाव नहीं होता। और अपने बेटे से उसे
कामवासना का कोई रूप नहीं दिखाई पड़ता, इसलिए प्रेम उसका परम शुद्ध हो पाता है। जब तक पति भी बेटे की तरह न दिखाई पड़ने लगे, तब तक स्त्री पूर्ण तृप्त नहीं हो पाती है।
लेकिन पुरुष की स्थिति उलटी है। अगर पत्नी उसे मां की तरह दिखाई पड़ने लगे, तो वह दूसरी पत्नी की तलाश पर निकल जाएगा। पुरुष मां नहीं चाहता, पत्नी चाहता है। और भी ठीक से समझें, तो पत्नी भी नहीं चाहता, प्रेयसी चाहता है। क्योंकि पत्नी भी स्थायी हो जाती है। प्रेयसी में एक अस्थायित्व है और बदलने की सुविधा है। पत्नी में वह सुविधा भी खो जाती है।
स्त्री का चित्त समग्र है, इंटिग्रेटेड है। स्त्रियों का नहीं कह रहा हूं। जब भी मैं स्त्री शब्द का उपयोग कर रहा हूं, तो स्त्रैण अस्तित्व की बात कर रहा हूं..!!

*जय श्री महाकाल🌿💕*

*जय श्री महाकाल🌿💕* *आँखे_थक_गई_आसमान_देखते_देखते*

*वो_तारा_टूटा_ही_नही_जिसे_देख_कर_तुम्हे_मांगू_महादेव*
*💕🌿जय_श्री_महाकाल*

*💐ॐ नमः शिवाय ॐ💐*

*हर हर शिव शंभु बम बम हर हर तेरी हो रही पूजा हर घर हर घर शिव शंभु भोले हर हर हर हर तेरी हो रही पूजा हर घर हर घर भक्तों पे करते दया सदा तेरे नाम के चर्चे हर गाँव शहर ओ मेरा बाबा हैं औघड़ दानी तुम कहलाते हो गंगाधर त्रिलोक के तुम हो स्वामी शिव भोले अंतर्यामी हो अजर अमर अविनाशी ओ भोले औघड़ दानी तेरा जो भी नाम सुमिरन करता हैं तू बाबा उसके संकट हरता हैं जो गंगाजल का एक लौटा बाबा तुझको अर्पण करता हैं मिलती हैं सब खुशिया उसको वो जाता भव से पार उतर शिव शंभु भोले हर हर हर तेरी हो रही पूजा हर घर हर घर भक्तों पे करते दया सदा तेरे हो रहे चर्चे गाँव शहर तेरा रूप बड़ा मतवाला हैं तुझे कहते डमरू वाला हैं तू मस्त मंलग हो शिव जोगी तू बाबा भोला भाला हैं जो आ जाता हैं तेरे दर ना भटके वो फिर इधर उधर तेरी दया दृष्टि से हे भोले जाता हैं उसका भाग्य संवर शिव शंभु भोले हर हर तेरी हो रही पूजा हर घर हर घर भक्तों पे करते दया सदा तेरे हो रहे चर्चे गाँव शहर जो हर हर बम बम गाता हैं खुद जपता और जपवाता हैं तुम करते हो भोले उसपे महर वो तेरे मन को भाता हैं बस चढ़ा ले एक जल का लौटा तू भरता हैं भोले उसका कोटा भक्तों के काम संवारते हो अपने नितिन की रखते खबर शिव शंभु बम बम हर हर हर तेरी हो रही पूजा हर घर हर घर भक्तों पे करते दया सदा तेरे हो रहे चर्चे गाँव शहर शिव शंभु भोले हर हर हर तेरी हो रही पूजा हर घर हर घर शिव शंभु बम बम हर हर हर तेरी हो रही पूजा हर घर हर घर हर घर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव*

*💐जय हो मणीमहेंश कटे कलेशं💐*

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