दिल छू लेने वली कविता माँ के लिये…समर्पित..

*☝एक बार इस कविता को*
*💘दिल से पढ़िये*
*😋शब्द शब्द में गहराई है…*

*⛺जब आंख खुली तो अम्‍मा की*
*⛺गोदी का एक सहारा था*
*⛺उसका नन्‍हा सा आंचल मुझको*
*⛺भूमण्‍डल से प्‍यारा था*

*🌹उसके चेहरे की झलक देख*
*🌹चेहरा फूलों सा खिलता था*
*🌹उसके स्‍तन की एक बूंद से*
*🌹मुझको जीवन मिलता था*

*👄हाथों से बालों को नोंचा*
*👄पैरों से खूब प्रहार किया*
*👄फिर भी उस मां ने पुचकारा*
*👄हमको जी भर के प्‍यार किया*

*🌹मैं उसका राजा बेटा था*
*🌹वो आंख का तारा कहती थी*
*🌹मैं बनूं बुढापे में उसका*
*🌹बस एक सहारा कहती थी*

*🌂उंगली को पकड. चलाया था*
*🌂पढने विद्यालय भेजा था*
*🌂मेरी नादानी को भी निज*
*🌂अन्‍तर में सदा सहेजा था*

*🌹मेरे सारे प्रश्‍नों का वो*
*🌹फौरन जवाब बन जाती थी*
*🌹मेरी राहों के कांटे चुन*
*🌹वो खुद गुलाब बन जाती थी*

*👓मैं बडा हुआ तो कॉलेज से*
*👓इक रोग प्‍यार का ले आया*
*👓जिस दिल में मां की मूरत थी*
*👓वो रामकली को दे आया*

*🌹शादी की पति से बाप बना*
*🌹अपने रिश्‍तों में झूल गया*
*🌹अब करवाचौथ मनाता हूं*
*🌹मां की ममता को भूल गया*

*☝हम भूल गये उसकी ममता*
*☝मेरे जीवन की थाती थी*
*☝हम भूल गये अपना जीवन*
*☝वो अमृत वाली छाती थी*

*🌹हम भूल गये वो खुद भूखी*
*🌹रह करके हमें खिलाती थी*
*🌹हमको सूखा बिस्‍तर देकर*
*🌹खुद गीले में सो जाती थी*

*💻हम भूल गये उसने ही*
*💻होठों को भाषा सिखलायी थी*
*💻मेरी नीदों के लिए रात भर*
*💻उसने लोरी गायी थी*

*🌹हम भूल गये हर गलती पर*
*🌹उसने डांटा समझाया था*
*🌹बच जाउं बुरी नजर से*
*🌹काला टीका सदा लगाया था*

*🏯हम बडे हुए तो ममता वाले*
*🏯सारे बन्‍धन तोड. आए*
*🏯बंगले में कुत्‍ते पाल लिए*
*🏯मां को वृद्धाश्रम छोड आए*

*🌹उसके सपनों का महल गिरा कर*
*🌹कंकर-कंकर बीन लिए*
*🌹खुदग़र्जी में उसके सुहाग के*
*🌹आभूषण तक छीन लिए*

*👑हम मां को घर के बंटवारे की*
*👑अभिलाषा तक ले आए*
*👑उसको पावन मंदिर से*
*👑गाली की भाषा तक ले आए*

*🌹मां की ममता को देख मौत भी*
*🌹आगे से हट जाती है*
*🌹गर मां अपमानित होती*
*🌹धरती की छाती फट जाती है*

*💧घर को पूरा जीवन देकर*
*💧बेचारी मां क्‍या पाती है*
*💧रूखा सूखा खा लेती है*
*💧पानी पीकर सो जाती है*

*🌹जो मां जैसी देवी घर के*
*🌹मंदिर में नहीं रख सकते हैं*
*🌹वो लाखों पुण्‍य भले कर लें*
*🌹इंसान नहीं बन सकते हैं*

*✋मां जिसको भी जल दे दे*
*✋वो पौधा संदल बन जाता है*
*✋मां के चरणों को छूकर पानी*
*✋गंगाजल बन जाता है*

*🌹मां के आंचल ने युगों-युगों से*
*🌹भगवानों को पाला है*
*🌹मां के चरणों में जन्‍नत है*
*🌹गिरिजाघर और शिवाला है*

*🌹हर घर में मां की पूजा हो*
*🌹ऐसा संकल्‍प उठाता हूं*
*🌹मैं दुनियां की हर मां के*
*🌹चरणों में ये शीश झुकाता हूं..*

जितना आप अपनी माँ को प्यार करते हैं उतना LIKE करें

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खूबशूरत कहानी…..[जरूर पढ़़ें]

एक पांच छ: साल का मासूम सा बच्चा अपनी छोटी बहन को लेकर मंदिर के एक तरफ कोने में बैठा हाथ जोडकर भगवान से न जाने क्या मांग रहा था..!!

कपड़े में मैल लगा हुआ था मगर निहायत साफ,उसके नन्हे नन्हे से गाल आंसूंओं से भीग चुके थे..!!

बहुत लोग उसकी तरफ आकर्षित थे और वह बिल्कुल अनजान अपने भगवान से बातों में लगा हुआ था..!!

जैसे ही वह उठा एक अजनबी ने बढ़ के उसका नन्हा सा हाथ पकड़ा और..

पूछा:-क्या मांगा भगवान से..!
उसने कहा:-मेरे पापा मर गए हैं उनके लिए स्वर्ग,मेरी माँ रोती रहती है उनके लिए सब्र, मेरी बहन माँ से कपडे़, सामान मांगती है उसके लिए ‘पैसे’..!!

तुम स्कूल जाते हो..?
अजनबी का स्वाभाविक सा सवाल था।

हां जाता हूं, उसने बच्चे ने कहा…!!

किस क्लास में पढ़ते हो ? अजनबी ने पूछा।

नहीं अंकल पढ़ने नहीं जाता.. मां चने बनाकर देती है वह स्कूल के बच्चों को बेचता हूं।
बहुत सारे बच्चे मुझसे चने खरीदते हैं,हमारा यही काम धंधा है..!!

उस बच्चे का एक एक शब्द मेरी रूह में उतर रहा था..!!

तुम्हारा कोई रिश्तेदार..??
न चाहते हुए भी अजनबी ने उस बच्चे से पूछ बैठा।

पता नहीं,
मां कहती है गरीब का कोई रिश्तेदार नहीं होता..
मां झूठ नहीं बोलती,

पर अंकल…
मुझे लगता है मेरी मां कभी कभी झूठ भी बोलती है,
जब हम खाना खाते हैं हमें देखती रहती है।

जब कहता हूं मां तुम भी खाओ,तो कहती है मैने खा लिया था,उस समय लगता है की मां झूठ बोल रही है।

बेटा अगर तुम्हारे घर का खर्च मिल जाय तो पढाई करोगे ?

★बिल्कुलु नहीं..★

क्यों…?

पढ़ाई करने वाले,गरीबों से नफरत करते हैं अंकल,

हमें किसी पढ़े लिखे हुए ने कभी नहीं पूछा-पास से गुजर जाते हैं।

अजनबी हैरान भी था और शर्मिंदा भी..!!
फिर उस बच्चे ने कहा:-हर दिन इसी इस मंदिर में आता हूं,कभी किसी ने नहीं पूछा यहां सब आने वाले मेरे पिताजी को जानते थे।मगर हमें कोई नहीं जानता..!!

बच्चा जोर-जोर से रोने लगा और बोला:- अंकल जब बाप मर जाता है तो सब लोग अजनबी क्यों हो जाते हैं….?

मेरे पास इसका कोई जवाब नही था और ना ही मेरे पास बच्चे के सवाल का जवाब है।

ऐसे कितने मासूम होंगे जो हसरतों से घायल हैं।।

बस एक कोशिश कीजिये और अपने आसपास ऐसे ज़रूरतमंद यतीमों,बेसहाराओ को ढूंढिये और उनकी मदद किजिए …………………….

मंदिर मे सीमेंट या अन्न की बोरी देने से पहले अपने आस- पास किसी गरीब को भी देख लेना शायद उसको आटे की बोरी की ज्यादा जरुरत हो ।

इस पोस्ट को पढ़ कर शायद किसी ईन्सान के अंदर का देवता जाग जाए कहीं ऐसे बच्चो को अपना भगवान मील जाए..!!

कुछ समय के लिए एक गरीब बेसहारा की आंख में आंख डालकर देखिये आपको क्या महसूस होता है।

मेरा आप लोगो से यही विनम्र निवेदन है कि..??.
स्वयं में और समाज में बदलाव लाने के प्रयास जारी रखें।।

अपने लिये तो जानवर भी जीते हैं।।

दिल को छू लेने वाली कहानी…!!(जरूर पढ़े)

🌹🌻🍀🍁🌺🌻🍁🍀🌹
: एक आदमी ने एक बहुत ही खूबसूरत लड़की से शादी की. शादी के बाद दोनो की ज़िन्दगी बहुत प्यार से गुजर रही थी. वह उसे बहुत चाहता था और उसकी खूबसूरती की हमेशा तारीफ़ किया करता था. लेकिन कुछ महीनों के बाद लड़की चर्मरोग (skin Disease) से ग्रसित हो गई और धीरे-धीरे उसकी खूबसूरती जाने लगी. खुद को इस तरह देख उसके मन में डर समाने लगा कि यदि वह बदसूरत हो गई, तो उसका पति उससे नफ़रत करने लगेगा और वह उसकी नफ़रत बर्दाशत नहीं कर पाएगी.

इस बीच एक दिन पति को किसी काम से शहर से बाहर जाना पड़ा. काम ख़त्म कर जब वह घर वापस लौट रहा था, उसका accident हो गया. Accident में उसने अपनी दोनो आँखें खो दी. लेकिन इसके बावजूद भी उन दोनो की जिंदगी सामान्य तरीके से आगे बढ़ती रही.

समय गुजरता रहा और अपने चर्मरोग के कारण लड़की ने अपनी खूबसूरती पूरी तरह गंवा दी. वह बदसूरत हो गई. लेकिन अंधे पति को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था. इसलिए इसका उनके खुशहाल विवाहित जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. वह उसे उसी तरह प्यार करता रहा.

एक दिन उस लड़की की मौत हो गई. पति अब अकेला हो गया था. वह बहुत दु:खी था. वह उस शहर को छोड़कर जाना चाहता था. उसने अंतिम संस्कार की सारी क्रियाविधि पूर्ण की और शहर छोड़कर जाने लगा. तभी एक आदमी ने पीछे से उसे पुकारा और पास आकर कहा, “अब तुम बिना सहारे के अकेले कैसे चल पाओगे? इतने साल तो तुम्हारी पत्नि तुम्हारी मदद किया करती थी.”

पति ने जवाब दिया, “दोस्त! मैं अंधा नहीं हूँ. मैं बस अंधा होने का नाटक कर रहा था. क्योंकि यदि मेरी पत्नि को पता चल जाता कि मैं उसकी बदसूरती देख सकता हूँ, तो यह उसे उसके रोग से ज्यादा दर्द देता. इसलिए मैंने इतने साल अंधे होने का दिखावा किया. वह बहुत अच्छी पत्नि थी. मैं बस उसे खुश रखना चाहता था.”

सीख – खुश रहने के लिए हमें भी एक-दूसरे की कमियों के प्रति आँखें बंद कर लेनी चाहिए और उन कमियों को नज़रन्दाज कर देना चाहिए.!!
🌹🍁🌻🍀🍂🌺🍂🍁🍀🌹🌻

Joks

😇😇😇😇😇😇😇😇😇
एक शराबी पूरा टून्न हो कर घर जा रहा था!😇

😇रास्ते में मंदिर के बाहर पुजारी दिखा!🛤

😇शराबी ने पुजारी से पूछा सबसे बड़ा कौन?😇

😇उस से पीछा छुड़ाने के लिए पूजारी ने कहा ये मंदिर बड़ा😜

😇शराबी बोला मंदिर बड़ा तो धरती पर कैसे खड़ा!🏛⛪⛪⛪🕌
👌पुजारी: धरती बड़ी!🌎

शराबी: धरती बड़ी तो शेषनाग पर क्यों खड़ी?👌🌎🌎🌎
👌
पुजारी: शेषनाग बड़ा!👌🐍🐍🐍

👌शराबी: शेषनाग बड़ा तो शिव के गले में क्यों पड़ा!🐍🐍🐍

पुजारी: शिव बड़े !👌

👌शराबी: शिव बड़े तो पर्वत पर क्यों खड़े?🙃🙃🙃🙃

पुजारी: पर्वत बड़ा!👌🏔🏔🏔🏔

👌शराबी: पर्वत बड़ा तो हनुमान की ऊंगली पर क्यों पड़े?👌

👌पुजारी: हनुमान बड़े!🐒

शराबी: हनुमान बड़े तो राम के चरणों में क्यों पड़े?👌🐾

👌पूजारी: राम बड़े!🌺

शराबी: राम बड़े तो रावण के पीछे क्यों पड़े?👌

👌पूजारी: अरे मेरे बाप तू बता कौन बड़ा?

👌
शराबी: इस दुनिया में वो बड़ा
जो पूरी बोतल पीकर भी सीधा खड़ा !
😜😜😜😜😂😂

Like करोगे तभी मजा आएगा।

Cool joks

1.पप्पू की गर्लफ्रेंड ने रात में पप्पू को फोन किया

गर्लफ्रेंड – मैं आज बहुत अकेला महशुस कर रही हूँ

पप्पू – तो इसमें क्या है क्या तेरे कमरे में टीवी है ?

गर्लफ्रेंड – हाँ है ना

पप्पू – तो एक काम कर कोई हॉरर मूवी लगा कर देख

उसके बाद देख बिलकुल अकेलापन नही लगेगा

हर वक़्त लगेगा की कोई पीछे खड़ा है।

2. पप्पू – क्या तू जानता है एक बार मेरी प्रेमिका ने मुझे अपने घर पर बुलाया मैं घर पहुंचा घंटी बजाई..

गप्पू- अच्छा उसे बाद क्या हुआ?

पप्पू- उसकी छोटी बहन ने दरवाजा खोला वो बहुत सुंदर थी।

गप्पू- फिर क्या हुआ?

पप्पू -वो बोली आप बहुत स्मार्ट हो पर घर पर कोई नहीं है।

मैं अपनी बाइक की तरफ जाने लगा। उसी समय उसके घर वाले बाहर आकर मेरी शराफत की तारीफ करने लगे और कहा हमें ये रिश्ता मंजूर है.

गप्पू-फिर?

पप्पू – अब उन्हें ये कौन बताए की मैं तो बाइक लॉक करने जा रहा था।

3. गप्पू ने एक लड़की को कमल का फूल दिया।

लड़की ने गप्पू को एक थप्पड़ मारा।

पप्पू लड़की को बोला – अरे ये तूने क्या किया, मैं तो बीजेपी का प्रचार कर रहा हूं।

लड़की बोली- हाँ तो, मैं भी कांग्रेस का प्रचार कर रही हूं।

हाय मेरी बैटरी : मोबाइल की बैटरी के बिना ऐसी होती है हालत…[दूसरा अंतिम भाग]

बैटरी सुबह चार्ज, दोपहर आतेआते पावरबैंक शरणागत. पावरबैंक भी कोई खास मदद नहीं कर पा रहे हैं. समय किस के पास है इत्ता. सबकुछ फास्ट चाहने वाली युवापीढ़ी के लिए यह भी धीमीगति के समाचारों की तरह है. यही हाल रहा, तो फ्यूचर में बैंकों से ज्यादा पावरबैंक खोलने पड़ेंगे. हर एकाध किलोमीटर पर होंगे, जहां से स्मार्टफोन वाले पावर लेंगे और अपनी आभासी दुनिया में मशगूल हो जाएंगे.
कभीकभी लगता है कि पूरा देश ही पावरबैंक है, जिस से हर कोई अपनेअपने हिसाब से चार्जिंग खींचने में लगा है. ऐसे बैंकों की खास टैगलाइन हो सकती है, ‘चलेगा फोन, बढ़ेगा देश.’ नारों के जरिए देश बहुत बढ़ जाया करते हैं.
देश भले ही गड्ढे में चला जाए, मगर हमारा फोन चलते रहना चाहिए. इसी फिक्र में हर व्यक्ति बैटरी सहेजने के मूड में और पावर सेविंग मोड में है. उन सब फीचर्स को फौलो कर रहा है जहां बैटरी की बचत हो सकती है. इतनी सेविंग तो लाइफ की भी नहीं होती. जिंदगी रहे न रहे, बस अंतिम समय तक बैटरी बची रहे दोस्तों.
चाह ऐसी है कि चाहे हाईटैक किस्म के प्लेन, डब्बे, रक्षा उपकरण, सिलेबस, स्कूल, कालेज, यूनिवर्सिटी, गवर्नमैंट इत्यादि भले मत बनाओ, चाहो तो डैवलपमैंट को भी एक बार पोस्टपौंड कर दो, भले छीन लो सारे रोजगार, लेकिन प्लीज बैटरी का कोई स्थायी इंतजाम कर दो.
‘बाबा, बैटरी को ले कर बहुत परेशान हूं, यह ज्यादा देर नहीं चलती, कोई समाधान बताइए?’
दुनिया में हर समस्या का समाधान बताने वाले बाबा लोग भी बैटरी के नाम पर बगलें झांकने लगेंगे, ‘बेटा, बैटरी तो हमारी भी नहीं चल पा रही, जो मिली है, उसी से काम चला. यों समझ ले जीवन की तरह यह भी क्षणभंगुर है.’
पब्लिक के हाल देख कर सरकारें आगे इस दिशा में बढ़ जाएं, तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए. सरकारों को चाहिए ऐसी ही पब्लिक, जो भेड़ों की तरह सिर दिनरात स्मार्टफोन की स्क्रीन में धंसाए रहे. ऊपर उठाए, तब तक 5 साल मजे से बीत जाएं.
हो सकता है, भविष्य में चुनाव बैटरी आधारित ही हो जाएं. घोषणापत्रों में शुमार हो जाए, हम देंगे मुफ्त बैटरी. एक दल लोक लुभावन घोषणा करेगा. दूसरा कूद पड़ेगा ‘जी, हम देंगे बैटरी का बाप बैटरा. भले हर हाथ को काम न दे पाएं सरकारें, मगर हर हाथ बैटरी जरूर देने लगेंगी.’
घरघर चार्जिंग की सप्लाई भी दे सकती हैं. फिर प्रैशर कुकर, साडि़यां, बरतन, चावल, टीवी मुफ्त देने का वादा करने वाले दल सूची में स्मार्टफोन भी जोड़ लेंगे.
‘अजी, उन को छोडि़ए, हम ऐसी बैटरी बनाएंगे, जिसे चार्ज करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. हमारी बैटरी पर मुहर लगाइए और चौबीस घंटे स्मार्ट रहिए, इस स्मार्टफोन ने लोगों को स्मार्टली बिना काम ही बिजी कर दिया.
घर, दफ्तर, सार्वजनिक स्थलों से बस, ट्रेन, प्लेन में देखिए. सफर शुरू होते ही सब हरकत में आते हैं और स्मार्ट फोन में बिजी हो जाते हैं. बगल में कोई बम भी फिट कर जाए, तो पता तभी चलेगा, जब वह फट जाएगा. तब भी शायद होश में न आएं सब से पहले स्मार्ट फोन संभालेंगे, फिर बैटरी चैक करेंगे. सैल्फी विद बौंब या लाइव हो जाएंगे आफ्टर बौंब.

हाय मेरी बैटरी : मोबाइल की बैटरी के बिना ऐसी होती है हालत..[पहला भाग]

हाय मेरी बैटरी : मोबाइल की बैटरी के बिना ऐसी होती है हालत….

“जिस तरह जल बिन मछली तड़पती है वैसे ही आज का यूथ बिना बैटरी के इतना असहाय हो जाता है कि पूछो मत. आखिर स्मार्टफोन की स्मार्टनैस बिना बैटरी के गधे के सींग सरीखी जो होती है.”

कभी होस्टल जा रहे बेटे को मां पूछती थी, ‘बेटा, सभी कपड़े रख लिए हैं न, घी का कनस्तर, अचार का डब्बा ठीक से रख लेना और जो सूखे मेवे रखे हैं, उन्हें बराबर खाते रहना. चड्डीबनियान, तौलिया वगैरा मत भूल जाना.’
फिर सासबहू के सीरियल का दौर आया. मां की चिंता में शेविंग किट, ब्लैड, डिओ वगैरा आ गए. ‘एक से क्या होगा बेटा, 2 रख ले.’
‘मां, इस की एक बूंद ही काफी है एक बार की शेविंग में,’ बेटा कौन्फिडैंटली जवाब देता. बेटे की होशियारी पर मां मन ही मन बलैयां उतार लेतीं.
अब लेटैस्ट मां पूछ रही है, ‘बेटा, बैटरी फुल चार्ज है न. पावरबैंक जरूर रख लेना. ट्रेन में बैठते ही चार्जर पावर प्लग में लगा देना, नहीं तो कोई और ठूंस कर बैठ जाएगा. किसी से ज्यादा घुलनामिलना मत, कानों में हैडफोन लगा कर पूरा चौकन्ना रह कर आराम से गाने सुनते हुए जाना. बेटा संस्कार भले ही घर भूल कर चला जाए, लेकिन हैडफोन बिलकुल नहीं भूल सकता.
अकसर मांबाप कालेज जाते बेटे से यह पूछना भूल जाते हैं कि हैलमैट क्यों नहीं लगाया? लाइसैंस, नो पौल्यूशन कार्ड, इंश्योरैंस पेपर, आरसी वगैरा हैं साथ में?
लेकिन जब से हाथ में स्मार्टफोन आया है, बेटा काफी समझदार हो गया है. बस, बेटे का एक ही दुख है, बैटरी, बैटरी ज्यादा नहीं चलती. बीच मझदार में दम तोड़ देती है. वैसे बेटे के इस विराट दुख में सब का दुख समाहित है, हाय, बैटरी ज्यादा नहीं चलती.देखा जाए, तो एक स्मार्टफोनधारी की मनोस्थिति उस मोर की तरह होती है जो अपने सुनहरे, सजीले पंखों को देख कर नाचता तो है, लेकिन पैरों की तरफ देख कर मन ही मन रोता है. उसी तरह स्मार्टफोन से जो खुशी मिलती है, थ्रिल जगता है, टच करते हुए गुदगुदी होती है, लेकिन बैटरी को देख कर वह काफूर हो जाती है. हाय, कितनी क्षणभंगुर है बैटरी लंबी है स्मार्टफोन में देखी जाने वाली चीजों की फेहरिस्त.
बैटरी पीडि़त के मन से अपनेआप ही काव्यनुमा आह फूट पड़ती है. परीक्षा के पर्सेंट से भी मूल्यवान बैटरी के पर्सेंट हो गए हैं. उस पर आदमी लगातार टकटकी लगाए रहता है. वह छीज रही है, दिल बैठ रहा है. एक अदद बैटरी के आगे इंसान खुद को कितना असहाय, निरुपाय, पराजित सा फील करता है.
आज हर हाथ को बतौर फोन स्मार्ट होने का भ्रम है. एक आंख इसे देख कर खुश होती है तो दूसरी बैटरी को घूर कर कुढ़ती है. हर्ष और विषाद मिश्रित ऐसे चेहरे देख कर लगता है, देश की सब से बड़ी समस्याएं आतंक, घुसपैठ, सीमा विवाद, लोकतंत्र, कट्टरता, बेरोजगारी, सरकार, भ्रष्टाचार, नोटबंदी, जीएसटी वगैरा नहीं, बल्कि एक अदद बैटरी है. बाकी समस्याएं तो क्षणिक आवेशभर की हैं, परमानैंट प्रौब्लम तो बैटरी की ही है.
बैटरी हमारी चिंता के केंद्रीय भाव में आ बैठी है. बैटरी चले, तो लाइफ चलती सी लगे. 2 लोग आपस में बातचीत भी करते हैं, तो बैटरी दन से बीच में कूद पड़ती है. यार, इस बैटरी का कोई समाधान बताओ न. दोपहर भी नहीं पकड़ती?
‘सेम प्रौब्लम हीयर,’ सामने से जवाब आता है, अभी थोड़ी देर पहले 70 प्रतिशत थी, अभी देखा तो 24 प्रतिशत.
कुल वार्त्तालाप में आधे से भी ज्यादा को बैटरी हजम कर जाती है. बैटरी से शुरू हो कर वार्त्ता पावरबैंक पर खत्म हो जाती है.
इंसान आकुल है. कितने व्हाट्सऐप, कितने यूट्यूब, कितने फेसबुक, ट्विटर, वायरल सच, वीडियो जिंदगी में गहरे तक धंसे पड़े हैं, बैटरी बीतने से पहले सब से गुजर जाना है.
वैसे यह भी ताज्जुब की बात है कि आज फोन तो अच्छेखासे स्मार्ट हो रहे हैं और लगातार होते ही जा रहे हैं. सुबह जो फीचर थे, शाम तक कई फटीचर से हो जाते हैं. बावजूद बैटरी कतई बाबा आदमहव्वा के जमाने सी चल रही है. लगता है इस पर कोई काम ही नहीं हो रहा है. गोया कि सारा जोर तन साफ करने पर है, मन का मैल छांटने की फिक्र किसी को नहीं.
ऐसी बैटरी आदमी को दार्शनिक भी बना देती है. बेटा, जो है उसी से संतोष कर. यह मान ले, बैटरी का कैरेक्टर नेताओं और उन के बयानों की तरह हो गया है. सुबह दिए, दोपहर को मुकरे, शाम तक कह देंगे, कौन सा बयान?

कहानी जारी है….